गुरुवार, 18 जनवरी 2018

खुजली , नोचनी , चुनचुनि आदि से निजात पाने के लिए घरेलू उपाय।

खुजली , नोचनी , चुनचुनि आदि से निजात पाने के लिए घरेलू उपाय। 

 आजकल खुजली आम बीमारी हो गई है । जैसे ही शरीर से कपड़ा उतारते है वैसे ही शरीर चुंचुनाने लगता है । कभी बहुत ज्यादा नोचनी हो जाता है ।इसके लिए घरेलू नुस्खा रामबाण की तरह काम करता है ।

 उपाय :-

शुद्ध सफेद वैसलीन 50 ग्राम , ब्राह्मी की पत्तियों के ताजा रस 3 ग्राम मिलाकर पेस्ट या मरहम बनाले । फिर निम के पत्ति को थोड़े से पानी मे उबाल कर , उस पानी को ठंडा होने के बाद शरीर को धोले ।फिर उस मरहम को शरीर पर लगाले । इस तरह खुजली , फोड़ा , फुंसी , चुंचुनानी आदि से धीरे धीरे ठीक हो जाता है ।

रविवार, 19 नवंबर 2017

मिर्गी के रोग का शर्तिया ईलाज

        मिर्गी के रोग का  शर्तिया ईलाज

         


मिर्गी का रोग एक दिमागी रोग है । इस रोग में आदमी अचेत ( बेहोश ) होकर गिर जाता है । इसका दौरा सड़क के बीच , खतरनाक स्थान , या किसी वाहन में , जहां अधिक पानी हो या आग हो वहां पर उस व्यक्ति का दिमाग काम करना बंद कर देता है और मिर्गी का दौरा पड़ जाता है ।उस समय लोग रोगी को घेर लेते है । कुछ लोग सहानुभूति दिखाते है । तो कुछ लोग इधर - उधर की बाते करने लगते है । उसे चमड़े की जूते सुंघाने लगते है । जिसे रोगी हीन भावना का शिकार हो जाता है ।
       इस रोग को घरेलू उपचार से ठीक किया जा सकता है जो इस प्रकार से है ।

 उपचार विधि :- 

पहली विधि -

( 1 ) अदरक का सोंठ - 10 ग्राम
( 2 )पीपल ( किराने के दुकानों पर आसानी से मिल जाती है ) - 10 ग्राम
( 3 )काली मिर्च :- 10 ग्राम

 इन तीनो चीजो को शुद्ध घी में भून लें । तीन ग्राम भुनी हुई हींग ले । इन चारों का चूर्ण बनाले । सुबह शाम तीन - तीन चुटकी फांक कर गाय का दूध पी ले । कुछ ही दिनों में मिर्गी का रोग ठीक हो जाएगा ।

दूसरी विधि :- 

अदरक के  सोठ का चूर्ण दो चम्मच , तुलसी दल पांच पत्तियां , काली मिर्च के दस दाने को पीस ले । फिर इसे शहद के साथ सेवन करे ।
 इसके सेवन से दिमाग की चेतना लौटेगी और रोग धीरे - धीरे समाप्त हो जाएगा ।

मंगलवार, 6 जून 2017

चीनी ( सुगर ) का शर्तिया ईलाज

           चीनी ( सुगर ) का शर्तिया ईलाज 

सामग्री -

( 1 ) लहसुन छिला हुआ 25 ग्राम

( 2 ) अदरक ताजा 50 ग्राम 

( 3 ) पुदीना ताजा 50 ग्राम

( 4 ) अनार दाना खट्टा 50 ग्राम 


         इन चारों समाग्री को पीस कर चटनी बनाले ,और सुबह दोपहर और शाम को एक एक चम्मच चाट ले ।इसे पुरानी से पुरानी सुगर ठीक हो जायेगी ।यहाँ तक शरीर के किसी अंग का घाव चीनी के कारण ठीक नही हो पाता है  वह भी ठीक हो जाता है ।

रविवार, 11 दिसंबर 2016

प्याज के गुण

                                   प्याज के गुण

पेट के गैस की वीमारी में प्याज का सेवन काफी लाभकारी होता है 


प्रकृति का वरदान है प्याज । प्याज मनुष्य के स्वास्थ के बहुत ही फायदेमन्द है । आज के दुनिया में शायद ही कोई होगा जो प्याज को नही जानता होगा । यह शरीर को चुस्त दुरुस्त बनाता है बल्कि मेहनत करने वालो को शक्ति प्रदान करता है । आयुर्वेद के अनुसार प्याज में कब्ज , बवासीर , भूख न लगना , चर्मरोग, नामर्दी आदि रोगों को नष्ट करने की शक्ति होती है । गर्मी के दिनों में लू लगने और हैजा से रक्षा करने में प्याज से ज्यादा उपयोगी कुछ नही है । इसलिए इसे प्रकर्ति का वरदान कहा गया है । यही वजह है कि आज लगभग हर घर में प्याज का भरपूर प्रयोग किया जाता है ।
        प्याज पूरे विश्व में पाया जाता है इसे अलग अलग जगहों पर अलग अलग नामो से जाना जाता है । इसे हिंदी में प्याज , मराठी में कांदा , बंगला में पेयाज , पंजाबी में गांडा , गुजराती में कांदो , अरबी में वसूल और अंग्रेजी में ओनियन ( ONION) का नामो से जाना जाता है ।
       प्याज में जल लगभग 86%, प्रोटीन 1.2 प्रतिशत ,वसा 0.1%, कैल्शियम 0.18% , कार्बोहाड्रेट 11.6% , फास्फोरस 0.06% , आयरन 0.12% , पाये जाते है ।
साथ ही प्याज में एक उड़नशील तैल होता जिसमे गन्धक , लिग्निट , एल्ब्युमें , पर्सफुटक अम्ल , लार चूने  के सिट्रेट आदि तत्व होते है । यही कारण है की जब प्याज को काटा जाता है तो आँखों में आंसू आजाते है ।
    प्याज में पाये जाने वाले तत्व शरीर के लिए बहुत ही उपयोगी है ।कैल्शियम हड्डी के लिए , आयरन रक्तल्पता में , क्लोरीन सन्धियों और मांसपेशियों के लिए गन्धक चर्मरोग  में , आयोडीन घेंघा में , विटामिन '  ए '  संक्रामक रोगों में विटामिन 'c'  दांतो के रोग , गठिया  आदि में लाभदायक है । प्याज के नियमित सेवन से इन रोगों से पूरा वचाव हो जाता है ।

   गैस ( Flatulence )

गैस की वीमारी में प्याज का सेवन बहुत ही लाभकारी होता है ।
  घी - तेल मशाला आदि की अधिक सेवन , उल्टा सीधा खाना , पुरानी कब्ज , अधिक समय तक बैठ कर काम करना , समय बेसमय पर खाना खाना , रात में देर रात तक जगाना आदि कई कारणों से गैस बनने लगता है । धीरे धीरे गैस अनेक विमारियो का कारण बन जाता है ।

प्रयोग विधि - 

(1) प्याज , अदरक और लहसुन तीनो की चटनी बनाकर सेवन केरने से पेट की गैस धीरे धीरे ठीक हो जाता है ।
 ( 2 ) एक चम्मच प्याज के अर्क में थोड़ा सा काला नमक डालकर सेवन करने से गैस में काफी लसभ मिलता है ।

मंगलवार, 5 जुलाई 2016

अदरक द्वारा पेट संबन्धी रोगों का उपचार

अदरक द्वारा पेट संबन्धी रोगों का उपचार उपचार विधि :- ( 1 ) अदरक को कूटकर एक चम्मच रस निकाल ले । इस रस में एक चुटकी सेंधा नमक डालकर ऊँगली से धीरे - धीरे चाटे । एक साथ कभी न खाये बरना गला में खुश्की का फन्दा लगने का डर रहता है । एक एक बून्द चाटने से पेट में लार भी पहुँचेगी जो पेट में जलन को कम कर देती है परन्तु पाचन क्रिया को ठीक कर देती हैं । ( 2 ) भोजन के बाद एक चम्मच अदरक का रस एक ग्लास पानी में एक निम्बू के रस को डाल कर पी लें । इसे भोजन पचने में सहायता मिलती है और अपच नष्ट हो जायेगी ।

शनिवार, 2 जुलाई 2016

गले के टाँसिल के कारगर घरेलू उपचार

गले के टाँसिल के कारगर घरेलू उपचार 


अधिकांशतः सर्द - गर्म  या जाड़े के समय में गले में ठण्ड लग जाने से टॉन्सिल बढ़ जाता है ।टाँसिल के  ज्यादा बढ़ जाने पर खाने में प्रोबलेम होता है गला दर्द करने लगता है , कभी - कभी बुखार भी हो जाता है । गला सूज जाता है ।

उपचार

    प्रथम विधि :-   इसके लिए अदरक कुचल कर थोड़े से सरसो के तेल में गर्म इसे गले पर लेप कर मुलाय  कपड़ा से पट्टी बाँध ले । धीरे - धीरे  सारी सूजन ठीक हो जायेगी ।

         दूसरी विधि :- एक चुटकी अदरक के सोंठ , एक चुटकी हल्दी और एक पुती लहसुन को एक कप पानी में औंट कर पिजाये । इसे टाँसिल ठीक हो जाती है । अदरक का सोंठ त्वचा को सुखाने की काम करती है और हल्दी और लहसुन दर्द को ठीक करने का काम करता है ।

शुक्रवार, 1 जुलाई 2016

एसिडिटी या अम्ल पित्त ( गैस ) का अदरक द्वारा शर्तिया घरेलू उपचार

एसिडिटी या अम्ल पित्त ( गैस ) के रोग का अदरक द्वारा शर्तिया घरेलू उपचार


आजकल यह रोग घर - घर देखे जाने लगे है आयुर्वेद में एसिडिटी को अम्लपित्त कहते है । इस रोग में उदर में अम्ल के तत्व बढ़ जाते है तथा शरीर पर पित्त का प्रकोप होने लगता है । जो लोग गरिष्ठ भोजन , चाट - मसाले , खटाई अधिक मात्रा में खाते है वे लोग इस बिमारी के ज्यादा शिकार होते हैं । मानसिक कार्य करने वाले , देर तक बैठ क्र काम करने वाले , पाखाना - पेशाब देर तक रोकने वाले व्यक्ति भी इस रोग के शिकार हो जाते हैं। चिंता , दुःख , अशांति आदि कारण से भी व्यक्ति को गैस या एसिडिटी , अम्ल पित्त जैसा रोग होजाता है । यह रोग देखने में साधारण होता है पर यह रोग बहूत ही भयानक होता है ।

      लक्ष्ण -  ( 1 ) पेट में गैस बनना ,  ( २ )  त्वचा पर खुजली होना ( 3 ) पेट फूल जाना तथा बार - बार डकार आना ( 4 ) हाथ - पैरों  से पसीना आना ( 5 )  जब गैस की अधिकता हो जाती है तो बार बार डकार आती है एवं नींद नही आती है । ( 6 )  कभी कभी गैस की अधिकता के कारण गला घुटने लगता है ।


उपचार विधि - 

( 1 ) अदरक का सोंठ 25 ग्राम एवं सुखा धनिया 25 ग्राम । दोनों को महीन पीस कर दो कप पानी में आग पर रख दे । जब पानी पक कर एक कप हो जाए तो इसे दिन भर में तीन बार पियें । इसे पेट की सारी अम्ल निकल जायेगी ।

 ( 2 )  सोंठ 5 ग्राम धनिया10 ग्राम दोनों को पीस कर शहद के साथ दिन में तीन बार चाटे ।इसे प्रयोग से तीन चार दिनों में ही अम्ल या गैस छूमन्त्र हो जाता है ।

 परहेज :-  गरिष्ठ भोजन न खाये , खाली पेट न रहे इसके लिए समय पर भोजन करे ।भोजन में तेल , घी , मसाला का का प्रयोग ना मात्रा का ले । सुबह - शाम हरी घास पर टहले एवं हल्का व्यायाम करे ।

गुरुवार, 30 जून 2016

आवाज फट जाने या बैठ जाने पर अदरक राम बाण की तरह काम करता है ।

आवाज फट जाना या बैठ जाने पर अदरक राम बाण की तरह काम करता है ।


 जब किसी भी गायक का आवाज बैठ जाय तो अदरक का प्रयोग जरूर करनी चाहिए ।


कभी- कभी अत्यधिक ठण्ड   या अधिक गर्मी , ठंडा - गर्म पानी या पेय पदार्थ  पिने से आवाज बैठ जाता है ( गला बैठ जाता है ) । कभी कभी ऊँची आवाज या अत्यधिक बोलने से आवाज बैठ जाता है , ऐसा समस्या अधिकांशतः  गायक ( सिंगर ) के साथ आता है ।
इसे दूर करने के लिए अदरक अचूक दवा है ।

प्रयोग विधि - 


( 1 )
एक गाँठ अदरक को लेकर उसे चटनी की तरह पीस ले और उसमे दो लवंग और थोड़ी सी हींग को पीस कर मिला दे । फिर उसे शहद के साथ चाटे ।
 कैसी भी बैठी हुई आवाज क्यों न हो , तुरन्त ठीक हो जायेगी ।

(२) 100 ग्राम सौंठ , 2 ग्राम हींग एंव 4 ग्राम लौंग को पीस कर उसमे एक चुटकी नमक डाले ।फिर उस चूर्ण को सुबह शाम हल्का गर्म पानी से ले । गला तुरन्त ठीक हो जाएगा।

( 3 ) अदरक के रस को शहद के साथ लेने से यह छाती में जमे बलगम को निकालने में राम बाण की तरह काम करता है ।

मंगलवार, 7 जून 2016

अदरक नस नाड़ियो को स्वच्छ कर पुरुषो के मर्दानी ताकत को बढ़ाता है ।अदरक में पुंसत्व की शक्ति होती है । अदरक ( आदी ) नामर्दो को मर्द बनाती है ।

अदरक नस नाड़ियो को स्वच्छ कर पुरुषो के मर्दानी ताकत को बढ़ाता है ।अदरक में पुंसत्व की शक्ति होती है । अदरक ( आदी ) नामर्दो को मर्द बनाती है ।

        अदरक का जन्म धरती की गर्मी में एक जड़ के रूप में होता है ।लेकिन यह मानव जीवन को प्राण वायु देती है ।इसकी जड़ में ऐसी अदभुत शक्ति होती है जो सैकड़ो रोगों को पछाड़ कर मानव शरीर में ऊर्जा प्रदान कर देती है । इसके सेवन से यह छाती में जमे हुए कफो को निकाल कर यह नसों को धो देती है ।यह सांसो से दुर्गन्ध को निकाल देती है । यह नस नाड़ियों में जमे श्लेष्मा को निकालकर साफ़ कर देती है ।इस प्रकार अदरक एक ओर शरीर में प्राण वायु का संचार करती है तो दूसरी ओर अशुद्द वायु को धक्के देकर बाहर कर देती है । इसके साथ ही अदरक के सेवन से पुरुषो में सांड की तरह शक्ति आजाती है ।आजकल पौरुष बल बढ़ाने के सैकड़ो दवाये चल गयी है ।डाक्टर , बैध , हकीम लोगो को मर्दानी ताकत बढ़ाने के नाम पर खूब ठगाई करते है ।नासमझ व्यक्ति इनके चंगुल में फस कर धन के साथ साथ अपने प्राकृतिक पौरुष बल को भी खो देते है ।ऐसे लोगो को अदरक का प्रयोग करनी चाहिए इसे उनका पौरुष बल सौ गुना बढ़ जायेगा ।इस प्रकार अदरक नामर्दो को मर्द बनाती है ।अदरक जिगर के खराबी को ठीक कर उसे शक्तिशाली बनाती है ।यह रक्त की सफाई कर देती है । यही शुद्ध रक्त जब यौननेंद्रियों में जाई है तो मनुष्य का मर्दानी ताकत किलकारी मारकर कूदने लगता है ।चरक ने लिखा है क़ि अदरक में सांड की तरह शक्ति होती है । अतः हमे इसकी शक्ति को पहचाननी चाहिए ।
   प्राचीन आयुर्वेद शास्त्रियों ने अदरक को बलवर्द्धक बताया है ।यूरोप में प्रतिवर्ष भारत से ही हजारो टन अदरक जाता है ।यूरोपवासी इसे इंडियन जिंजर कहते है ।वे लोग इसका प्रयोग प्रयोग टॉनिक या स्वास्थ्यवर्धक औषधि के रूप में करते है । इसके खाने से मनुष्य का वदन गठीला और ताकतवर बनजाता है जिसे मनुष्यो में अपने आप पौरुष बल बढ़ जाता है ।पुरुषार्थी वह होता है जो साहस के साथ कठिनाइयों को जीतते हुए आगे बढ़ता है ।अदरक व्यक्ति को एसे ही जीवन जीने की शक्ति स्फूर्ति प्रदान करती है । आज इसका महत्व सारा संसार में है ।शरू में यूरोप और अफ़्रीकी देशो में इसके प्रयोग सिर्फ पौरुषबल बढ़ाने के रूप में किया जाता था पर अब धीरे - धीरे इसके अन्य उपयोगो से भी वे परिचित हो गए । आज थोड़ी बहुत अदरक सभी देशो में पैदा होती है । इससे अनेको मूल्यवान दवाइयाँ भी बनने लगे है ।पता नही अदरक के खाने से हम मुँह क्यों बिचकाते है ?
   प्रयोग बिधि - इसका सेवन चटनी , आचार या सब्जी में किसी भी तरह करे यह फायदा ही पहुचाता है ।
  रात्रि को सोते समय एक चम्मच सोंठ अदरक दो , पिसी हुई लवंग और थोड़ी सी मिश्री को खा कर ऊपर से एक ग्लास दूध पिले । इसे नामर्दी दूर हो जाती है ।

   

रविवार, 5 जून 2016

यौन शक्ति बढ़ाने के घरेलू उपाय  , सफेद प्याज के मुरब्बा यौन शक्तिबर्धक

यौन शक्ति बढ़ाने के घरेलू उपाय 

यौन शक्तिवर्धक सफ़ेद प्याज का मुरब्बा।



प्याज एक प्राकृतिक यौन शक्ति वर्धक और शीघ्रपतन को दूर कर स्तम्भन बढ़ाने वाला हैं। सफ़ेद प्याज का प्रयोग एक ऐसा प्रयोग है जो एकदम सस्ता हैं और जिसको आप प्रतिदिन प्रयोग करके 80 साल की आयु में भी अनेको स्त्रियों के साथ रमण कर सकेंगे। कमज़ोरी नाम क्या होता हैं सब भूल जायेंगे।
   
    प्याज के मोरब्बा बनाने की बिधि


सफ़ेद प्याज – पैतालीस 45 पीस
शुद्ध शहद – आवश्यकतानुस

सर्वप्रथम सफ़ेद प्याज का छिलका उतार लीजिये, अब इन प्याज में किसी सलाई की मदद से बीच बीच में 8-10 छेद कर दीजिये। सभी प्याज में ऐसे छेद कर लीजिये। और इन सब प्याज को एक कांच के बर्तन में डालकर रख लीजिये। कांच का बर्तन तीन चौथाई तक भरे। अब इस बर्तन को शुद्ध शहद से पूरा भर दीजिये। इसको 45 दिन तक ढक कर रख लीजिये। 45 दिन बाद आपका बेजोड़ यौन शक्ति वर्धक प्याज का मोरब्बा तैयार हो जायेगा।



सेवन विधि।

प्रति दिन रात को सोने से १ घंटा पहले ये बना हुआ मुरब्बा एक पीस खा लीजिये। इसको प्रतिदिन खाने से आप में घोड़े से भी ज़्यादा बल आ जाएगा। शरीर में खून की आपूर्ति हो जाएगी। चेहरा लाल टमाटर जैसा खिल जायेगा। और बुढ़ापे का अनुभव तो कभी नहीं होगा। सदा जवान रहेंगे।

सावधानी।

खट्टी चीजो, फ़ास्ट फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक्स, धूम्रपान, शराब आदि का सेवन ना करे। इस प्रयोग का सम्पूर्ण फायदा लेने के लिए प्रयोग काल के प्रथम 25 दिन सम्भोग नहीं करना। उसके बाद भले निरंतर सम्भोग करते रहे। इस से ऐसी ताक़त मिलेगी जिसके आगे सब दवाये फेल हैं। और मन सदैव शांत रखे, हमेशा स्त्री गमण के बारे में सोचने से धातु कमज़ोर होती हैं और शक्ति का नाश होता हैं। अधिक सहवास करना सेहत के लिए नुकसानदेह हैं। शरीर से ओज तेज़ का नाश होता हैं। ये प्रयोग उन लोगो के लिए ही बताया हैं जो लोग अपनी शादी शुदा ज़िंदगी से परेशान हैं। और बचपन की गलतियों की वजह से अपना जीवन नरक समान बना लिया हैं।
       निरन्तर सेवन के लिए 45 दिनों के इसी तरह पुनः बनाले ।




शुक्रवार, 3 जून 2016

अदरक (आदी ) मनुषयो को युवा बनाती है , साथ ही आँखों को चमक देती है ।

अदरक (आदी ) मनुषयो को युवा बनाती है , साथ ही आँखों को चमक देती है ।

     अदरक के सेवन से मनुष्य सर्वदा युवा बना रहता है ।


             अदरक के अनेको फायदे है समय के साथ - साथ स्त्री - पुरुष दोनों वृद्धावस्था को प्राप्त होते है । स्त्री शरीर से होती है एवं पुरुष मन से परन्तु जो स्त्री - पुरुष अदरक का सेवन किसी न किसी रूप में करते रहते है । वे देखने में भले ही बूढ़े लगने लगे पर भीतर से वे युवा होते है । सचमुच वे दीर्घायु होते है क्योकि अदरक रोगों को भगाती है । जब शरीर रोगों से रहित होगा तो बूढ़ा भी क्यों होगा ? अदरक खाने से त्वचा का चिकनापन बढ़ता है । शरीरी के सभी अंग सुचारू रूप से काम करते रहते है । मन को निर्मल बनाने में भी अदरक का बड़ा हाथ होता है ।अदरक के " सेंटिनलतत्व " शरीर के अंदर काम करने वाले मशीनों को लुब्रिकेशन प्रदान करता है । अदरक के सेवन से शरीर हल्का एवं शांत रहता है ।

             अदरक नेत्रो को चमकीला बनाता है ।यह बात बिलकुल सत्य है की हम दाल , सब्जी , चाट आदि में अदरक डालते है तो यह केवल स्वाद न बढ़ाकर आंतो को दुरुस्त रखती है । जब आंत ठीक रहता है तो माथा स्वस्थ रहता है । माथा मुख का अंग है जो आँखों को किरण प्रदान करता है ।इसलिए अदरक के सेवन से आँखों की रौशनी बरकरार रखती है । इसलिए अदरक को खाने में निश्चित रूप से सेवन करनी चाहिए ताकि यह पेट को ठीक कर आँखों को बल प्रदान करे । इसतरह अदरक के सेवन के अनेको फायदे है ।

गुरुवार, 26 मई 2016

अदरक के गुण - सैकड़ो रोगों का दूर भगाता है अदरक , निमोनिया में अदरक ( आदी ) बहुत ही लाभकारी होता है ।

अदरक के गुण - सैकड़ो रोगों का दूर भगाता है अदरक , निमोनिया में अदरक ( आदी ) बहुत ही लाभकारी होता है ।


  अदरक का पौधा चौड़ी पत्ती वाला हरे रंग का होता है । परन्तु अदरक की जड़े जमीन के भीतर चौड़ी गाँठ के रूप में होती है । इसका स्वाद कुछ तीखा होता है । इसके जड़ को सुखा कर सोंठ बनालेते है ।सोंठ और दोनों की गुण धर्म अलग - अलग होता है ।
   भिन्न - भिन्न जगहों पर इसे भिन्न भिन्न नामो से जाना जाता है । लैटिन में इसे जिंजीवर ऑफिनेलिस कहते है ।कोई इसे श्रृंगवेर कहता है तो कोई इसे सवशतक तो इसे भद्र तो कहीँ इसे विश्वऔषध , कर्म कल्याणी , आदी , विश्वापुरा नामो से जाना जाता है ।

    अदरक के प्रयोग से पेट का दर्द , खांसी , जुकाम , लकवा , गठिया , निमोनिया , नपुंसकता , शरीर को झुक जाना , गला का बैठ जाना , हिस्टीरिया आदि अनेको रोग ठीक हो जाता है ।
 यह धरती का सबसे सस्ता एवं सुलभ औषधि माना जाता है । यह रामवाण की तरह काम करता है ।
 
    निमोनिया में :- अकसर छोटे बच्चों को निमोनिया हो जाता है । अदरक के प्रयोग से निमोनिया में बहुत ही लाभ मिलता है ।सरसो के तेल में सोंठ का चूर्ण मिलाकर उसे आग पर खौला ले । फिर इसे ठन्डा करके रोगी के छाती पर मले ।इसे रोग को बहुत ही लाभ मिलता है ।

रविवार, 20 मार्च 2016

नीम -मधुमेह ( चीनी ) या डायबिटीज के बिमारी का दुश्मन है ।

नीम -मधुमेह ( चीनी ) या डायबिटीज के बिमारी का दुश्मन है ।

             इस बिमारी में रोगी को नीम की छाल की काढ़ा पीनी चाहिए । 50 ग्राम निम के छाल को एक कप पानी में औट ले ।आधा कप रह जाए तो इसे छान कर सुबह पीले । इस रोग में करेले की सब्जी लाभदायक होता है ।खान पान में सयंम रखे । मधुमेह में खजूर जरूर खानी चाहिए ।क्योंकि खजुर में मधुमेह को नष्ट करने की शक्ति होती है ।यधपि खजूर मीठा होता है पर खजूर में मधमेह को दूर करने के गुण पाये जाते है । अतः खजूर का सेवन सात्विक भोजन करने बाद ही करनी चाहिए । एक बार में 100 ग्राम से अधिक नही खानी चाहिये । खजूर खाने के बाद पानी नही पीनी चाहिए ।पर कुल्ला जरूर कर ले ।इस तरह कुछ दिनों तक नीम के काढ़े के सेवन से मधुमेह कन्ट्रौल हो जाता है ।